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अपने से
चाहने वाले
डा० अनिल सवेरा जी दुवारा भेजी एक सुंदर रचना...
अरे बच्चो बहुत् दिन हो गये कोई गीत ही नही सुना ना... तो चलो आज तुम्हे एक ऎसा गीत सुनाते है, जि सिर्फ़ तुम्हे ही नही, तुम्हारे मां बाप को भी बहुत पसंद आयेगा....तो जल्दी से पालती मार कर बेठो ओर ध्यान से सुनो...
यह कविता भी हमे डा० अनिल सवेरा जी ने भेजी है, हम सब की ओर से उन का धन्यवाद.
यह सुंदर बाल कविता भी हमे अनिल सवेरा जी ने भेजी है. धन्यवाद
चित्र लिये हे abhivyakti से ऎतराज होने पर हटा दिये जायेगे, उन का धन्यवाद
हमको दीजे ये वरदान
वरद हस्त सिर पर रख माता
दिव्य चेतना भर दो मन में
समरसता की शुभ ज्योति को
फैलायेंगें हम कण -कण में
भारत माँ के सारे बच्चे
सिंह रूप हम धर लेंगें
दिव्य धरा का मान बचाने
हर बाधा से लड़ लेंगें
विंध्य, हिमाचल, अरावली का
ना झुकने दें माथा
देव भूमि है धरा हमारी
गायें सब मिल गाथा
पौरुषता का तेज भरो माँ
हम भगत, सुभाष बनें
जग-सिरमौर बने फिर भारत
माँ भारती का विश्वास बनें
यह रचना भी हमे डा० अनिल सवेरा जी ने जगाधरी से भेजी है, बहुत अच्छी अच्छी ओर मन भावन कविताये लिखते है, प्रस्तुत है यह रचना, तो बच्चो सब से पहले डा अनिल अंकल का धन्यवाद तो करो ना, चलो सब से पहले मै उन्हे दिल से आभार कहता हुं तो सब पाठको की तरफ़ से उन्हे धन्यवाद.
टक्कर

डा० अनिल सवेरा जी
डा० अनिल सवेरा जी की एक अति सुंदर कविता.......
बच्चो आप इस ब्लांग पर ज्यादातर डा० अनिल सवेरा जी की सुंदर कलम से लिखी बाल कवितायें पढते है, लेकिन उन से आप का कभी परिचय नही करवाया था, फ़िर एक बार मैने उन से प्राथना की कि आप अपने बारे मै कुछ विस्तार से बतलाये ताकि मेरे पाठक आप के बारे कुछ जान सके, ओर उन का परिचय मुझे मेल से मिला, वो आप को प्रस्तुत कर रहा हुं, अनिल जी का धन्यवाद.
अनिल जी का पुरा नाम डां० अनिल गोयल है, उपनाम उन्होने सवेरा रखा है,वो सपुत्र है स्व० श्री कैलाश चंद गोयल जी के, ओर उन की माता जी का नाम है श्री मती लीला वती गोयल, वो शादी शुदा है, उन की बीबी का नाम श्री मती अर्चना गोयल है,भगवान की दया से इन के तीन बच्चे है दो सुंदर सी बेटिया निष्ठा ओर प्रतिष्ठा ओर एक सपुत्र अशंक गोयल, अनिल जी का जन्म ५ जुलाई १९६३ मे जगाधरी ( हरियाणा ) मे हुआ,
फ़िर इन की शिक्षा भी बहुत अच्छी हुयी, प्रभाकर,बी ए,बी एड, एम ए (हिन्दी ) एम ए इतिहास,बी जे एम सी, पी जी डी टी, डी सी एच, डिप्लोमा उर्दू, संस्कृत भाषा प्रमाणपत्र, पी एच डी, पर्यावरण शिक्षा प्रमाण पत्र,
काम ..... अध्यापम( राज भाषा हिन्दी ) विद्धालय शिक्षा विभाग, हरियाणा.स्काऊट, ओर ए एन टी,
प्रकाशन से जुडे है....देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र-पत्रिकाऒं में समीक्षाएं, बाल कविताएं,कविताएं, गजलें,लेख,लघु कथाएं आदि प्रकाशित होती रहती है,
पुस्तकें...हरियाणवी लोक नाट्याकार एवं सांगी (जीवन परिचय ) हरियाणा साहित्य अकादमी से पुरस्कृत, हरियाणवी नृत्यगीत एक अध्ययन (ह० सा० अ० से प्रकाशित),बीसवीं शताब्दी उत्तरार्द्ध में लिखित हरियाणा के हिन्दी नाट्या साहित्य का शोधात्मक अध्ययन ( शोध ग्रंथ ), हरियाणा साहित्य अकादमी से प्रकाशित,उज्जवल बने भविष्य हमारा ( बाल काव्य संग्रह ) हरियाणा साहित्य अकादमी के अनुदान से प्रकाशित, लक्ष्य रखो सदा महान (बाल काव्य संग्रह ) शीघ्र प्रकाशित.
पुरस्कार एवं सम्मान....पंजाब विश्वविद्धालय से पत्राचार विभाग से पदक प्राप्त, हरियाणा विद्धालय शिक्षा बोर्ड, भिवानी से अनेको बार पुरस्कृत व सम्मानित, हरियाणा साहित्य अकादमी से पुरस्कृत, लोक संपर्क विभाग हरियाणा से पुरस्कृत, जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग हरियाणा से कई बार पुरस्कृत, विभिन्न विभिन्न समाचार पत्र-पत्रिकाऒं से पुरस्कृत,आप की महफ़िल ( साहित्यिक संस्था ), यमुना नगर व विभिन्न संस्थाऒ से सम्मानित,
प्रसारण...दूरदर्शन (हिसार ) से साक्षात्कार प्रसारित, आल इंडिया रेडियो कुरुक्षेत्र से वार्ताएं व रचनाएं प्रसारित,एजूसेट(विद्धालय शिक्षा विभाग, हरियाणा हेतू) से शैक्षिक प्रसारण, बिग एफ़.एम शिमला से बाल कवितायं प्रसारित.
विशेष.. हरियाणवी सांग परम्परा पर दूर दर्शन हिसार हेतू स्क्रिप्ट लेखन.
रुचियां.... नाट्य लेखन, मंचन, निर्देशन, अभिनय, मंच संचालन, छायांकन, भ्रमण, हरियाणवी लोक साहित्या तथा राष्ट्रभाषा हिन्दी पर सतत शोध, समाज सेवा आदि,
सम्पर्क करने के लिये, ओर बधाई संदेश देने के लिये अनिल जी का पता ओर फ़ोन ना०...
८२९ राजा साहब गली, जगाधरी-१३५००३, जिला यमुना नगर ( हरियाणा)
फ़ोन ना०...०१७३२-२४३२७३,०९४१६३-६७०२०
ओर इन का ई मेल आई डी.... dr.anil_savera@yahoo.co.in
यह सुंदर कविता भी हमे डा० अनिल सवेरा जी ने भेजी है, तो बच्चो सब से पहलेअनिल जी का धन्यवाद.
हिन्दी
मूषक पर होकर असवार
घर-घर में खुशियाँ ले आये
बह रही भक्ति रसधार
शिव के प्यारे गिरिजानंदन
बच्चों जैसे भोले- भाले
विघ्नविनाशन ज्ञान के दाता
भक्तों की बात कभी न टालें
प्रथम पूज्य गणेश जगवंदन
मोदक मिश्री इनको भायें
मन से ध्याओ दयावंत को
सब कारज सिद्ध हो जायें
आओ सब मिल शीश नवायें
मांगें मिलकर ये वरदान
मंगलमय हों कर्म हमारे
पायें सदगुण, निर्मल ज्ञान
गौरी नंदन गणपति बप्पा
करते हैं हम सब पर किरपा
आओ बच्चो मिलकर बोलो
हैप्पी बर्थ डे बप्पा........... हैप्पी बर्थ डे बप्पा
यह सुंदर कविता भी हमे डा० अनिल सवेरा जी ने भेजी है.....
यह बाल कविता हमे अनिल सवेरा जी ने भेजी है, आप के पास भी कोई सुंदर सी बाल कविता तो तो हमे भेजे, कोई चित्र, या कुछ भी जो बच्चो से समबंधित हो हमे भेजे, हम उसे यहां प्रकाशित करेगे.
मम्मी जी ने थी खीर बनाई,
मुन्ना ने जी भर कर खाई.
मुन्नी को दी बिलकुल थोडी,
निकली है उस मै भी रोडी.
मुन्नी लगी जोर से रोने,
मां को दिये ना कपडे धोने.
दी मां ने फ़िर भर कटोरी,
लगी मटकने पोरी पोरी
बच्चो आओ आज आप को हम एक विज्ञानिक जी से मिलवाते है, यह है हमारे दर्शन लाल बवेजा जी,विज्ञान अध्यापक (शिक्षा विभाग, हरियाणा) से
बनाने की विधि---- कार्य विधि----दो इंजक्शन की सिरिंज ले कर उन्हें एक तीन इंच के पाइप के टुकड़े से जोड़ देते है | पाइप और इंजक्शन की सिरिंज के जोड़ एयर टाइट होने चाहिए इस के लिए हम किसी भी अच्छे चिपकने वाले पदार्थ जैसे फैवी क्विक का प्रयोग कर सकते है | जोड़ते वक्त एक सिरिंज का पिस्टन 1\2 की अन्दर और दूसरी सिरिंज का पिस्टन पूरा बहार की और होना चाहिए |
पुरा पढने के लिये यहां किल्क करे
यह प्यारी सी कविता हमे भेजी है, कवि राज डां अनिल सवेरा जी ने, अगर आप भी कोई बाल कविता भेजना चाहे या आप इस ब्लांग से जुडना चाहे तो हमे मेल करे, आप सब का स्वागत है.
उपहार
डां अनिल सवेरा जी कि एक ओर सुंदर रचना आप सब के लिये....आप भी अपनी रचनाये भेज सकते है, या फ़िर इस ब्लांग पर मेम्बर बन कर खुद ही अपनी रचनाये प्रकाशित कर सकते है. धन्यवाद
आज की यह सुंदर कविता भी हमे कवि डां अनिल सवेरा जी ने ही भेजी है, उन की बहुत इच्छा हैदकि उन की एक बाल कविता के रुप मे पुस्तक छपे,मै यही आशा करता हुं कि इन की एक नही अनेक पुस्तके हिन्दी मै ओर बाल कविता के रुप मै
छपे, शुभकामनाओ सहित.
हे! हंस वाहनी
इस कविता के रचियता भी कविे डां अनिल सवेरा जी है, तो बच्चो आप बताये केसी लगी यह कवि
गुरु जी हमारे है भगवान.
कविे डां अनिल सवेरा
बच्चो आज की कविता भी हमे डां अनिल सवेरा जी ने भेजी है, ओर आप सब से माफ़ी चाहूंगा कि आज की बाल कविता मै एक शब्द अग्रेजी का आ रहा है, लेकिन इस को हटाने के लिये मुझे अनिल सवेरा जी से पूचना पडता, तो चलिये आज ... ऎसे ही सही......
गुब्बारा, बालून
कवि डां अनिल सवेरा जी
यह सुंदर बाल कविता भी हमे डां अनिल सवेरा जी ने भेजी है, अगर आप भी कोई बाल कविता हमे भेजना चाहे तो भेजियेगां, हम उसे जरुर यहां प्रकाशित करेगे, डां अनिल जी का धन्यवाद.
ऒस की बूंदे
यह बाल कविता भी हमे कवि डा अनिल सवेरा जी ने भेजी है.
लोमडी काकी, पहन के चप्पल,
चली खरीदने मीठा एप्प्ल .
एप्पल लगा उसे बडा मंहगा,
खरीद लिया उस ने लंहगा
लंहगा पहन लगी इतराने.
लोमड जी लगे मुस्कुराने.
अटका पांव तभी जल्दी मै
बोली ठीक थी मै साडी मै.
अब नही लंहगा पहनूंगी.
साडी मै ही खुश रह लुंगी
डां अनिल सवेरा
यह कविता भी हमे डां अनिल सवेरा जी ने भेजी है.
गुन गुना कर मच्छर जी ने
कान खा लिये रात
कहां कहां नही काटा उसने
क्या बताये बात.
मुंह पर काटा, हाथ भी काटा
काटे दोनो पांव
काट लिया शरीर सारा
लगा जहां भी दांव
तरकीब लडाई जितनी भी
वो सारी हो गई फ़ेल
मच्छर जी ने रात भर
बनाई हमारी रेल
Dr.anil savera
यह कविता भी मुझे डां अनिल सवेरा जी ने भेजी है , ओर मै यहां सब बच्चो के नाम इसे प्रकाशित कर रहा हुं.
प्यारे बच्चो यह कविता भी हमे अकल डां अनिल सवेरा जी ने आप सब के लिये भेजी है, आशा करता हू आप सब को पसंद आये, अगर पसंद आये तो अकल अनिल सवेरा जी को धन्यवाद जरुर कहे
हाथी जी को, आया चक्कर,
मच्छर ने जब मारी टक्कर,
टक्कर मार, खुशी से नाचा,
खाने लगा, मजे से शक्कर!!
बोला हाथी, नही छोडुंगा,
हाथ -पांव तेरे तोडूंगा,
क्रोध दिला मत मुझको ज्यादा,
नही तो तेरा सर फ़ोडूंगा.
मुस्कुरा कर मच्छर बोला,
करो तो कुछ,तुम अपना ध्यान,
फ़ूक मजाक मै ही मारू तो,
पहुच जाओगे, तुम शमशान.
लेखक डां अनिल सवेरा
यह चित्र मेने josh18.in.com से लिया है, उन का आभार,एतराज होने पर हटा दिया जायेगा
यह रचना मुझे इ मेल से आज डां अनिल सवेरा जी ने भेजी है हरियाणा से, ओर मुझे बहुत अच्छी लगी तो मेने इसे यहां प्रकाशित कर दिया, तो बच्चो आओ ओर सब से पहले डां अनिल जी का धन्यवाद करे... ओर फ़िर देखे यह सुंदर सी बाल कविता जो होली के रंग मै पुरी तरह से रंगी है.
होली का त्योहार अनोखा,
जिस मे है उत्साह.
बिल्ली मोसी को रंग कर
चुहा भी बोला वाह!!
हिरण आज कुचांले भरता
बना हुआ है शेर.
रंगा शेर को प्यार के रंग मे,
शेर रहा ना शेर.
एक अचंभा ऎसा देखा
उल्लू खेले दिन मे होली,
लोमडी काकी सजा रही है
रंगो से सुंदर होली.
होली का त्योहार अनोखा,
जिस मे है उत्साह.
बिल्ली मोसी को रंग कर
चुहा भी बोला वाह!!
श्याम सखा श्याम