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लंहगा

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

यह बाल कविता भी हमे कवि डा अनिल सवेरा जी ने भेजी है.

लोमडी काकी, पहन के चप्पल,
चली खरीदने मीठा एप्प्ल .
एप्पल लगा उसे बडा मंहगा,
खरीद लिया उस ने लंहगा
लंहगा पहन लगी इतराने.

लोमड जी लगे मुस्कुराने.
अटका पांव तभी जल्दी मै
बोली ठीक थी मै साडी मै.
अब नही लंहगा पहनूंगी.
साडी मै ही खुश रह लुंगी

डां अनिल सवेरा

1 आप की राय:

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुंदर, सवेरा जी को धन्यवाद...आपका आभार.

रामराम.

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