नमस्कार, आईये जुडे मेरे इस ब्लांग से, आप अपनी बाल कहानियां, कविताय़ॆ,ओर अन्य समाग्री जो बच्चो से के लायक हो इस ब्लांग मे जोडॆ,आप अगर चाहे तो आप भी इस ब्लांग के मेम्बर बने ओर सीधे अपने विचार यहां रखे, मेम्बर बनने के लिये मुझे इस e mail पर मेल करे, ... rajbhatia007@gmail.com आप का सहयोग हमारे लिये बहुमुल्य है,आईये ओर मेरा हाथ बटाये.सभी इस ब्लांग से जुड सकते है, लेकिन आप की रचनाये सिर्फ़ सिर्फ़ हिन्दी मे हो, आप सब का धन्यवाद

पोपाईय ओर आजादी

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

अरे बच्चो देखॊ तो सही यह पोपई केसे कैसे काम कर रहा है...

ब्रह्म कमल -बाल कविता

प्रस्तुतकर्ता निर्मला कपिला

ब्रह्म कमल
गिरी शिखरों मे सुन्दर खिलता
हँसता रहता ब्रह्म कमल
महकाता फूलों की घाटी
मखमल सा लगता कोमल

निचला भाग बैंगनी हल्का
ऊपर भाग गुलाबी सा
मनह इसका रंग बना है
पुष्प न और जवाबी सा

नित देवों के सिर पर चढ कर
यह धरती निधि बन जाता
बिना स्नान जो तोडता
वो  अधर्म कमाता है

ये अगस्त से अक्तूबर तक
बिखराता सौन्दर्य अपार
दर्शक मन्त्रमुग्ध रह जाते
सुषमा इसकी सुबह निहार

शिव प्रतिमा पर शोभा पाता
चढता है केदार के मंदिर
ये सहस्त्रदल कमल अनूठा
पाता मन श्रद्धा और आदर
    डा़ चक्रधर नलिन

दीपावली के शुभ अवसर पर आपको और आपके परिवार को शुभकामनाएं

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

diwali lamps




दीपावली के शुभ अवसर पर आपको और आपके परिवार को शुभकामनाएं

बापू --बाल कविता

प्रस्तुतकर्ता निर्मला कपिला

बापू
भारत की पुकार थे बापू
धरती की बहार थे बापू

जो सोचा वो करने वाले
नहीं किसी से डरने वाले
कंटक पथ पर चलने वाले
दीप शिखा से जलने वाले
कभी न राह बदलने वाले
शासक क्रूर मसलने वाले

सत्य अहिंसा हार थे बापू
पावन हृदय विचार थे बापू

भारत को चमकाने वाले
हिन्दी को अपनाने वाले
देश महान बनाने वाले
जग मे प्रेम बढाने वाले
सेवाधर्म  सिखलाने वाले
राष्ट्रपिता कहलाने वाले

सच्चे  नेक उदार थे बापू
जनता का आधार थे बापू

लेखक डा.चक्रधर नलिन


विग्यान --बाल कविता

प्रस्तुतकर्ता निर्मला कपिला

विग्यान
आओ गोलू,रहीम ,राधा
सीखें हम विग्यान
सुने पेड पौधों की कहानी
जय जय जय विग्यान

बढी उपज उसर हरियाली
मित्र बना विग्यान
टेलोविज़न पहुँच घर घर्
मिटा दिया अग्या

खोले बंद समय के ताल
करके नये अविश्कार
सै हुई ग्रह नक्षत्रों की
रचा नया संसार

इस पर निर्भर भविषय अपन
बना प्रकृति विग्यान्
कम्प्यूटर ने क्राँति  मचाई
काम बने आसान

अस्त्र शस्त्र इसके संहारी
रखना इन पर ध्यान
दूर किये दुख रोज़ हजारों
ला मुख की मुस्कान
जय जय जय विग्यान
लेखक-- डा़ चक्रधर नलिन जी

गमला

प्रस्तुतकर्ता निर्मला कपिला

गमला

यग्य कुण्डसा पवित्र गमला
हरा भरा मन भावन गमला

प्रकृति नये रूपों मे लाता
सुन्दरता पौरुश का दाता्
रंग विरंगे फूल खिलाता
शुद्ध वायू से घर भर देता
माता सा उदार है गमला

इसमे सुन्दर पौधे लगते
सुबह शाम को खूब महकते
पाकर धूप लहलहा उठते
जगमग जगमग हर पल होते
सब का चित चुराता गमला

तितली इस पर है मंडराती
हवा इसे नव गीत सुनाती
सभी रोग दुख दूर भगाती
जीवन कैसे जीयें सिखाता
रहा थकान मिटाता गमला

यग्यकुण्ड सा पवित्र गमला
हरा भरा मन भावन गमला

लेखक --डा. चक्रधर नलिन

प्रस्तुतकर्ता निर्मला कपिला

इच्छा

अम्मा नित्य रात को नभ मे
चँदा मामा क्यों आते हैं
सुबह देख कर सूरज दादा
दूर पहाडी क्यों छुप जाते हैं

सोच रहा हूँचँदा मामा
के संग मे जी भर कर खेलूँ
चन्द्र लोक सीढी से जाऊँ
हँस कर सारे संकट झेलूँ

चन्द्र लोक से रोज बृहपति
ग्रह की यात्रा पर मै जाऊँ
मंगल ग्रह ध्रुव लोक निहारूँ
अमृत कलश वहाँ से लाऊँ

धरती पर मुस्काने बाँटूँ
सब को अमृत बूँद पिलाऊँ
नहीं किसी का करूँ निरादर
सब को अपने गले लगाऊँ

लेखक---- डा. चक्रधर नलिन

veer putr baal kavita

प्रस्तुतकर्ता निर्मला कपिला

वीर पुत्र

वीर सैनिको निर्भय हो कर आगे बढते जाना
सीने पर हंस गोली खाना पीछे लौट नआना

धरती माता को प्रणाम कर,
आगे बढ्ते जाओ
मातृभूमि के लिये युद्ध मे
बढकर शीश कटाओ


किसी मुल्य पर राष्टृ रक्षको लक्षय विजय का पाना
माता बहने चाह रही हैं जय का तिलक लगाना

तुम्हीं यश तेज पराक्रम
तुम गौरव गरिमा हो
उदहारण हो सकल विश्व के
तुम स्वदेश महिमा हो

शपथ शत्रु को करो पराजित,कहता नया जमाना
कदम बढाते चलो निरन्तर समय न तनिक गवाना

जन्म भूमि की रक्षा मे जो
अपने प्राण लुटाते हं
शीश झुकाते सूर्य चन्द्र
मेले पर्व मनाते हैं

खट्टे करना दाँत शत्रु के पीछे फिर मुस्काना
वीरपुत्रब शस्त्र उठाओ पहन युद्ध का बाना
lekhak Dr. Chakardhar Nalin


chchanda mama

प्रस्तुतकर्ता निर्मला कपिला

चन्दा मामा
चन्दा मामा हाथ उठा कर,
भईया जी हैं नित्य बुलाते।
सोते नहीं देखते एक टक ,
कब से इन को खडे सुलाते

आसमान से नाता तोडो,
अपने को धरती से जोडो।
मुस्काते हैं गोद उठाओ,
इन से कभी नहीं मुख मोडो।

इन के संग घोड्र पर बैठो,
इन के संग हाथी पर बैठो।
दूध मलाई जी भर खाऔ,
भईया के घर चन्दा आओ।
लेखक --डा. चक्रधर नलिन जी

chiychidiya ban jaoon--baal kavita

प्रस्तुतकर्ता निर्मला कपिला

चिडिया बाल कविता
चिडिया बन जाऊँ

चाह रहा चिडिया बन जाऊँ।
पँख लगा कर नभ छू जाऊँ।

मुझ को अच्छा लगता ऊडना,
डाल डाल मीठे फल चखना।
देश भविश्य नया सुख पाऊँ.
चाह रहा चिडिया बन जाऊँ।

पर्वत सागर घूमूँ जी भर,
रहूँ किसी पर कभी न निर्भर।
तारों के संग नाचूँ गाऊँ.
चाह रहा चिडिया बन जाऊँ।

सरल मधुर हो खग सा जीवन ,
हो सुख दुख से उपर तन मन ।
जो भी मिले खुशी से खाऊँ,
चाह रहा चिडिया बन जाऊँ।
लेखक डा. चक्रधर नलिन

loosi raani--kavita

प्रस्तुतकर्ता निर्मला कपिला

लूसी रानी
लूसी रानी सूट पहन कर
बाँध गले मे टाई
भों भों कर अँग्रेजी बोले
हेलो बाई बाई
भागी देख बंदर भईया
जब पड गये दिखाई
विभु दादा डंडा ले कर दौडे
इनकी जान बचाई
खों खों कर बन्दर जी लौटे
रुकी साँस फिर आयी
जान बची लूसी रानी की
देती थैन्क्स बधाई
लेखक डा. चक्रधर नलिन जी

कॊवा ओर सयानी चिडिया

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

आओ बच्चो तुम्हे एक फ़िल्म दिखाते है, बहुत सुंदर , एक शिक्षा से भरी, यह फ़िल्म देख कर बताना कि तुम ने क्या शिक्षा ली इस फ़िल्म से, बहुत सुंदर कहानी है, तो बच्चो देखो...

अक्षत की चाल्

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

मम्मी पापा का हो गया झगडा
सोचा मैं जाऊँगा रगडा
खेल कूद नहीं पाऊँगा
साथ मे डाँट भी खाऊँगा
अब कोई जुगत लगानी होगी
दोनो की सुलह करानी होगी
नहीं तो सच ही जाऊँगा मारा
मैं छोटा सा अक्षत बेचारा
बस फिर ज़ोर से वो चिल्लाया
पेट दर्द का ढोंग रचाया
मम्मी ने पापा को आवाज़ लगाई
दोनो की तो जान पे बन आयी
दोनो ने मिल कर दवा पिलायी
अक्षत ने भी झ्ट शर्त लगायी
तभी पीऊँगा मै दवा
ागर करोगे मुझे से वादा
मुझे बाज़ार ले जाओगे
आईस्क्रीम खिलाओ गे
पीनी पडी कडवी दवाई
पर दोनो की सुलह कराई
कविता निर्मला कपिला दुवारा

बंदर की दुकान पर चले...

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

बच्चो तुम्हे पता है एक बार जंगल मै एक सयाने बंदर ने एक दुकान खोली.... अरे हां यार तुम मानो या ना मानो, सची मुची, ओर हां बंदर था भी बहुत सयाना, अरे तुम तो हंस रहे हो ... यार मान भी जाओ.... अरे तो खुद ही देख लो... इस बंदर की दुकान...

एक सीख

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

बच्चो आओ आज तुम्हे निर्मला आंटी जी की भेजी एक कविता सुनाते है, पढ कर बताना ओर निर्मला आंटी को धन्यवाद भी बोलना..... बहुत अच्छी कविता है, तो यह लो ...

एक सीख
आओ बच्चो तुम्हें दिखाऊँ
इक मँदिर इक गुर्दुवारा
देखो दोनो मे भगवान है
क्या मेरा क्या तुम्हारा
मस्जिद देखो या देखो चर्च
शीश झुकाना सब का फर्ज़
बच्चो तेरे मेरे की
कभी ना डालो रीत
मिलजुल कर रहोगे जितना
बढेगी उतनी प्रीत
सब धर्मों का एक ही सार
दया करुणा प्रेम पियार
गर तुम इसको मानोगे
तभी प्रभू को जानोगे
निर्मला कपिला जी की कलम से

बच्चे मन के सच्चे...

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

अरे बच्चो ! कहां हो भाई, सुना है बहुत गर्मी पड रही है , बाप रे, बच के रहना, बच्चो खुब पानी पीना, शिकंजवी,लस्सी ओर ऎसी बहुत सी चीजे जो आप सब के मम्मी पापा कहे, ओर हां ज्यादा चीनी नही बेटे, ओर पानी ऊबाल कर पीना तो ज्यादा अच्छा होगा.
चलो आज तुम्हे एक बहुत सुंदर गीत सुनाते है !! अरे मुझे कहां आता है गाना, अरे मुझे तो गीत लिखना भी नही आता, बस तुम सब के लिये मै सुंदर सुंदर गीत ढुंढु ढुंढ कर लाता हुं, तो बच्चो सुनो यह गीत..

मेरी नानी

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

मेरी नानी
मेरी नानी बडी सयानी
पर मेरे आगे भरती पानी

सब उससे यूँ डरते हैं
जब उसके तेवर चढते हैं

जब मेरे पास वो आती है
भीगी बिल्ली बन जाती है

मै उसको खूब नचाता हूँ
घोडी बना पीठ पर चढ जाता हूँ

सारे घर मे घुमा घुमा कर
खूब आनन्द उठाता हूँ

वो हाय तौबा मचाती है
लेकिन जब थक जाती है

फिर गोदी मे बिठा कर
प्यार वो मुझ को करती है

दुनिया भर की अच्छी बातें
फिर वो मुझ से करती है

उसके गुस्से को समझो यार
उसके गुस्से मे भी है प्यार


लेखक:- निर्मला कपिला जी(धन्यवाद सहित)

मेरी नातिन् भाग ३

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

आज इस कविता का तीसरा हिस्सा....
मेरी नातिन्
अब आगे सुनो उस की शैतानी
करती है अपनी मनमानी
जब वो सहज हो जाती है
खिलैनो की बारी फिर आती है
कुछ इधर फेँक कुछ उधर गिराती
जब मम्मी उसको डाँट पिलाती
तो भीगी बिल्ली बन जाती
फिर पापा को खूब दौडाती
घोडा बना पीठ पर चढ जाती
दोनो को वो खूब नचाती
फिर कम्प्यूटरचेयर पे चढ जाती
की बोर्ड पर हाथ चलाती
पूरा नेट वर्क करती क्न्ट्रोल
तार को देती साकेट से खोल
चिडिया की जब सुने आवाज़
चीँ चीँ करती जाती भाग
ऐसे उसकी बोलती बोली
जैसे हो वो इसकी सहेली
मम्मी कहती मेरी लाडली
पापा कहते मेरी जान
वो दोनो से बन जाती अनजान
नहीं हाथ पकडाती है
ना--ना--कह उन्हें चिढाती है
जब दोनो मुँह फुलाते हैँ
तो भाग गले लग जाती है
लेखन निर्मला कपिला जी दुवारा

मेरी नातिन

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

आज इस कविता का दुसरा भाग

मेरी नातिन
मेरी नातिन गोल मटोल्
मीठे लगते उसके बोल
बातें करके इतराती है
ऐसे सुरताल बनाती है
जैसे हो सरगम अनमोल
सुनाती हूँ दिन भर की शरारत
लडकी है या कोई बुझारत
बात इशारों से समझाये
मम्मी पापा भी चकराये
उठते ही कसमसाती है
जैसे कुछ समझाती है
ना समझो तो शोर मचाती
सब की सिटीपिटी गुम हो जाती है
फिर पापा बात समझते हैं
नैपी उसका बदलते हैं
फिर वो सहज हो जाती है
शरारत से मुस्कराती है
आज बस इतना ही काफी
जाने की चाहती हूँ माफी
कल फिर से मै आऊँगी
नयी शरारत बतलाऊँगी
ध्न्यवाद ... लेखक निर्मला कपिला जी का

मेरी नातिन

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

नमस्कार आप सभी को, आप सभी निर्मला कपिला जी को तो जानते ही है, मेने उन से पिछली बात प्राथना की थी कि आप कुछ मेरे इस ब्लांग पर भी लिखे, आज उन्होने मुझे एक कविता ई मेल से भेजी है, जब कि वो भी इस ब्लांग की मेम्बर है, ओर वो कविता मै आप सब को प्रस्तुत करता हूं.यह तीन भागो मे है, आज पहला भाग.

अगर आप भी इस ब्लांग के मेम्बर बनना चाहे तो मुझे अपना ई मेल पता भेज दे बस.
तो लिजिये ""निर्मला कपिला जी की बाल कविता"
मेरी नातिन
आसमान से उतरी है वो
ज्यों परियों की रानी
ठुमक ठुमक कर चलती है वो
जैसे गुडिया जापान

छोटी सी वो गोल मटोल
प्यारे मीठे उसके बोल्
बातें करते तुतलाती है
फिर मँद मँद मुस्काती है

हँसे खेले धूम मचाये
है वो बडी सयानी
जब खाने की बारी आये
तो करती है मनमानी

हँसती है वो फूलों जैसे
कलियों जैसे मुस्काती है
नयी शरारत कर के वो
बुलबुल से इतराती है

नेट पर देख के नाना नानी
उसकी प्यारी सी अदायें
सात समन्दर पार वो बैठे
देख उसे बहुत हर्षायेँ

दाल भात उसे ना भाये
फल सब्जी से मुँह चुराये
जब देखे वो दूध की बोट्ल
झट से पुस्सी कैट बन जाये

मम्मी की वो लाडली
पापा की है मानो जान
ऐसी प्यारी से बेटी को
सब खुशियाँ देना भगवान

बच्चो दूध मलाई खाओ
फल सबजी से ना मुँह चुराओ
अगर अच्छा होगा खान पान
तभी बनोगे तुम महान

निर्मला कपिला

सुनो सुनाता हू तुम को कहानी...

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

अरे बच्चो क्या तुम भी कभी पापा से नाराज हुये हो....
देखो तो इस बिटिया रानी के कितने नखरे है.

प्रस्तुतकर्ता shyam skha


धरती






तितली भौंरे इस पर झूमें
रोज हवाएं इसको चूमें
चंदा इसका भाई चचेरा
बादल के घर जिसका डेरा
रोज लगाती सूरज फेरा
रात कहीं है, कहीं सवेरा
पर्वत, झील, नदी, झरने
नित पड़ते पोखर भरने
लोमड़, गीदड़ शेर-बघेरे
करते निशि-दिन यहां चुफेरे
बोझ हमारा जो है सहती
वही हमारी प्यारी धरती


--श्याम सखा 'श्याम'
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प्यारी प्यारी दादी मां

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

हेल्लॊ बच्चॊ खुब छुट्टियो का मजा ले रहे है, सारा दिन ऊधम मचाते हो या नही? ओर तुम गांव मै या फ़िर शहर मै दादी मां के घर गये कि नही.... अरे सब गये, अच्छा अच्छा वही हो, ओर दादी मां को खुब तंग भी करते होगे, लेकिन दादी मां तो खुब खुश होती होगी ना... तो चलो आज अपनी अपनी दादी मां को यह गीत सुनाओ फ़िर देखो दादी केसे खुश होती है...

रेल गाडी रेल गाडी

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

छुक छुक छुक......छुक छुक छुक......रेल गाडी रेल गाडी.... छुक छुक छुक......छुक छुक छुक......
रुको भाई रेल गाडी वाले !!! अरे रुको रुको..... चलो बच्चे अब जल्दी से हमारी इस रेल गाडी के पीछे बेठ आओ.... १ २ ३ अब चली हमारी रेल गाडी.... छुक छुक छुक......छुक छुक छुक...... छुक छुक छुक...... छुक छुक छुक......

तालाश आप की

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

नमस्कार अजी आज आप सब से एक निवेदन है जो भी मेरे इस ब्लांग को अपनाना चाहता हो, यानि बच्चो के लिये अपनी कविता, कहानिया, फ़ोटो, जानकारियां,विडियो,बच्चो के खेल,पहेलियां ओर भी बहुत सी जान कारिया, शिक्षा की बाते लिखना चाहता हो तो मुझे इस पत्ते पर मेल करे, आप को मै इस ब्लांग का हिस्सेदार बना लुंगा, यानि आप को सीधा लिंक मिल जायेगा, अपनी रचना प्रकाशित करने के लिये.

तो आईये हम अपने बच्चो को कुछ अच्छा दे सके, चलिये मेरा साथ दे,आईये हम अपने बच्चो को हिन्दी से जोडे,
मै दिल से आप सब का आभारी रहुगां.
मेरा मेल राजभाटिया००७ एट जीमेल.कोम, या फ़िर इसे मेरे परिचय पर नोट कर ले, यहां लिखना थोडा सही नही, या फ़िर मुझे टिपण्णी मे अपना मेल भेज दे.
आप सभी का धन्यवाद

लकडी की काठी

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

अरे बच्चो आओ आज तुम्हे बहुत ही सुंदर गीत सुनाते है, लेकिन वादा करो तुम भी इसे याद करोगे...
तो सुनो......

नानी मां ओर एक सुंदर सा गीत

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

नानी को देखा है बच्चो , बहुत प्यार करती है ना, तो चलो आज तुम्हे नानी मां की वो कहानी सुनाते है जो हम सब ने बचपन मै सुनी थी, लेकिन ध्यान रहे कही नानी नारज हो गई तो मनाना भी तुम्हे ही पडेगा.....
तो सुनो

इस छछुंदर के बच्चे की एक ओर कहानी.

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

अरे बच्चो बताया था ना यह छछूंदर तो हम सब का दोस्त होता है, क्भी भी इसे मारना नही चाहिये...
चलो आज तुम इस की एक ओर कहानी देखॊ, कितना शरारती था यह छछूंदर लेकिन बहुत अच्छा दोस्त भी...

छछंदर, आओ बच्चो, ओर देखो

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

अरे बच्चो तुम जानते हो छछुंदर को ? नाम तो जरुर सुना होगा इस छछूंदर का, अरे यह देकने मे तो एक मोटे चुहे की तरह ही लगता है, ओर रहता है खेतो मे, ओर जब बहुत सर्दी पडती है ना, तो यह जमीन के अन्दर बिल बना कर छुप जाता है, लेकिन फ़िर थोडे समय मै ही यह बोर होने लगता है, तो फ़िर यह जगह जगह बिल से जमीन के ऊपर आ कर देखता है, कि कही बसंत तो नही आ गया, ओर सारी सर्दिया यह खेतो मे मेदानो मै जगह जगह छेद कर देता है,
फ़िर देखा यह किसान की मदद भी करता है, ओर कीडो को भी खा जाता है, तो चलिये आप को एक छछुंदर की कहानी दिखाते है, जो ऊपर जर्मन लिखी है उस का मतलब है, एक छछूंदर की कहानी..
तो आओ देखो...

बल से बडी बुद्धि

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

बच्चो आज तुम्हे एक शेर की कहानी सुनाता हु, ओर फ़िर कहानी सुन कर बताना केसी लगी, ओर क्या शिक्षा ली.
यह कहानी ली गई है...पंचतंत्र की कहानियां (डायमंड प्रकाशन) से,

एक गुफा में एक बड़ा ताकतवर शेर रहता था। वह प्रतिदिन जंगल के अनेक जानवरों को मार डालता था। उस वन के सारे जानवर उसके डर से काँपते रहते थे। एक बार जानवरों ने सभा की। उन्होंने निश्चय किया कि शेर के पास जाकर उससे निवेदन किया जाए। जानवरों के कुछ चुने हुए प्रतिनिधि शेर के पास गए। जानवरों ने उसे प्राणम किया.

फ़िर एक प्रतिनिधि ने हाथ जोड़कर निवेदन किया, ‘आप इस जंगल के राजा है। आप अपने भोजन के लिए प्रतिदिन अनेक जानवरों को मार देते हैं, जबकि आपका पेट एक जानवर से ही भर जाता है।’शेर ने गरजकर पूछा-‘तो मैं क्या कर सकता हूँ?’सभी जानवरों में निवेदन किया, ‘महाराज, आप भोजन के लिए कष्ट न करें। आपके भोजन के लिए हम स्वयं हर दिन एक जानवर को आपकी सेवा में भेज दिया करेंगे। आपका भोजन हरदिन समय पर आपकी सेवा से पहुँच जाया करेगा।’शेर ने कुछ देर सोचा और कहा-‘यदि तुम लोग ऐसा ही चाहते हो तो ठीक है। किंतु ध्यान रखना कि इस नियम में किसी प्रकार की ढील नहीं आनी चाहिए।’इसके बाद हर दिन एक पशु शेर की सेवा में भेज दिया जाता।

एक दिन शेर के पास जाने की बारी एक खरगोश की आ गई। खरगोश बुद्धिमान था।उसने मन-ही मन सोचा- ‘अब जीवन तो शेष है नहीं। फिर मैं शेर को खुश करने का उपाय क्यों करुँ? ऐसा सोचकर वह एक कुएँ पर आराम करने लगा। इसी कारण शेर के पास पहुँचने में उसे बहुत देर हो गई।’खरगोश जब शेर के पास पहुँचा तो वह भूख के कारण परेशान था। खरगोश को देखते ही शेर जोर से गरजा और कहा, ‘एक तो तू इतना छोटा-सा खरगोश है और फिर इतनी देर से आया है। बता, तुझे इतनी देर कैसे हुई?’खरगोश बनावटी डर से काँपते हुए बोला- ‘महाराज, मेरा कोई दोष नहीं है। हम दो खरगोश आपकी सेवा के लिए आए थे। किंतु रास्ते में एक शेर ने हमें रोक लिया। उसने मुझे पकड़ लिया।’मैंने उससे कहा- ‘यदि तुमने मुझे मार दिया तो हमारे राजा तुम पर नाराज होंगे और तुम्हारे प्राण ले लेंगे।’ उसने पूछा-‘कौन है तुम्हारा राजा?’ इस पर मैंने आपका नाम बता दिया।

यह सुनकर वह शेर क्रोध से भर गया। वह बोला, ‘तुम झूठ बोलते हो।’ इस पर खरगोश ने कहा, ‘नहीं, मैं सच कहता हूँ तुम मेरे साथी को बंधक रख लो। मैं अपने राजा को तुम्हारे पास लेकर आता हूँ।’खरगोश की बात सुनकर दुर्दांत शेर का क्रोध बढ़ गया। उसने गरजकर कहा, ‘चलो, मुझे दिखाओ कि वह दुष्ट कहाँ रहता है?’खरगोश शेर को लेकर एक कुँए के पास पहुँचा। खरगोश ने चारों ओर देखा और कहा, महाराज, ऐसा लगता है कि आपको देखकर वह शेर अपने किले में घुस गया।’शेर ने पूछा, ‘कहां है उसका किला?’ खरगोश ने कुएँ को दिखाकर कहा, ‘महाराज, यह है उस शेर का किला।’ खरगोश स्वयं कुएँ की मुँडेर पर खड़ा हो गया। शेर भी मुँडेर पर चढ़ गया। दोनों की परछाई कुएँ के पानी में दिखाई देने लगी।

खरगोश ने शेर से कहा, ‘महाराज, देखिए। वह रहा मेरा साथी खरगोश। उसके पास आपका शत्रु खड़ा है।’शेर ने दोनों को देखा। उसने भीषण गर्जन किया। उसकी गूँज कुएँ से बाहर आई। बस, फिर क्या था! देखते ही देखते शेर ने अपने शत्रु को पकड़ने के लिए कुएँ में छलाँग लगा दी और वहीं डूबकर मर गया।

आरतियां

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा



लिजिये आप लोगो के लिये कुछ आरतियां ....

शायद भारत मै लोगो को इन आरतियो कि जरुरत कम पडे क्योकि आप के यहां आम मिल जाती है, लेकिन बहुत से लोग विदेशो मै जिन्हे या तो भारत से लानी पडती है, या फ़िर नेट पर ढुढनी पडती है, तो लिजिये हम आप का काम आसन कर देते है.

धन्यवाद



पोपाईया ओर मिल्ट्री

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

अरे बच्चो जरा देखो तो सही इस पोपाई को क्या हुआ, बेचारा....


गणतंत्र दिवस

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

आईये आज आप को एक गीत सुनाऎ, अगर झूम ना पडो तो कहना...लेकिन उस से पहले आप सभी को गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत बधाई. ओर बच्चो याद रखना इस गीत को हमेशा

बच्चो के गीत,हम को मन की शक्त्ति देना

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

बच्चो.... स्कुल जाते हो क्या अभी,अरे अभी नही, क्यो... हां तो अभी छोटे हो... अच्छा अच्छा तुम जाते हो, ओर कोन सी प्राथना करते हो??अरे जब हम स्कुल जाते थे तो यह प्राथना हम करते थे...
ध्यान से सुनो...

बच्चो के गीत

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

बच्चो... सच्ची बताना तुम अपने भाई बहिनो से लडते हो या नही?? क्या लडते हो, कभी कभी..... अच्छा पहले यह गीत सुनो फ़िर बताना अब तुम्हारा दिल करता है लडने को??? अरे अच्छे बच्चे किसी से भी नही लडते, ओर अपने भाई बहिन से तो बिलकुल भी नही,बहुत प्यार से रहते है,

बच्चो का गीत सारे के सारे गामा

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

अरे बच्चो कहां हो भाई आज तुम सब .....? चलो चलो बेठे, अरे पलटू, अरे शोभिता, अरे छोटू सब बेठो पहले यह गीत सुनो फ़िर तुम सुनाना...

बच्चो की कहानिया, तेलानी राम १९

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

बच्चो.... इस कहानी को ध्यान से देखो ओर बताओ कि तुम ने इस कहानी से क्या शिक्षा ली.

बच्चो के गीत लला लला लोरी

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

बच्चो... ्तुम ने लोरी तो सुनी होगी जब बहुत ही छोटे थे तब ना, क्या भुल गये... अरे अरे... कोई बात नही आज हम सुनाये गे इन फ़िल्म के साथ एक सुंदर सी लोरी...

बच्चो की कहानिया,लकडी की काठी

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

बच्चो.आओ बच्चो तुम्हे आज घोडे की पीठ पर बिठा कर सेर करवाते है, चलो आओ आओ, अरे डरो मत, यह घोडा तो बहुत सयाना है, ना खाता है ना ही पीता है, बस बच्चो को अपनी पीठ पर बिठा कर खुब घुमाता है, तो चलो सब बच्चे लाईन मे आओ....

बच्चो की कहानिया, चुलबुली

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

बच्चो.... आओ आज तुम्हे चुलबुली से मिलवाते है, क्या तुम चुल वुली को जानते हो... नही ना, तो चलो बेठॊ ओर देखो चुलवुली

बच्चो की कहानिया, चुहे ने मारा बिल्ली को

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

बच्चो... आज तुम्हे जो कहानी सुना रहे है यह थोडी अलग है, इस कहानी को ध्यान से देखना, फ़िर ममी पापा से पुछ कर इसे समझाना, इस कहानी से हमे जो शिक्षा मिलती है उसे हमेशा ध्यान मे रखना, ओर ध्यान से देखो इस फ़िल्म को..

बच्चो की कहानियां धोखे वाज भेडिया

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

बच्चो आज तुम्हे एक ऎसे भेडिये की कहानी सुनाता हु , जो अपने आप को बहुत होशियार समझता था, तो देखो किसी को धोखे मे मत रखो ओर ना ही किसी को धोखा दो..

बच्चो की कहानियां लोमडी ओर कोवा

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

बच्चो आओ आज तुम्हे एक चालाक लोमडी की कहानी सुनाये,अरे नही दिखाये, ओर यह देख कर सबक लेना, कभी भी किसी की बातो मे मत आना, सयाने बनाना, तो शुरु करु कहानी या अभी गप्पे मारनी हे,तो देखो लोमडी ओर कोवे की कहानी.....

बच्चो की कहानियां.

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

अहसान फ़रामोश
बच्चो आओ आज तुम्हे एक ओर अच्छी कहानी सुनाते हे, लेकिन तुम कभी भी ऎसे मत बनना, अच्छे बच्चे बनना, तो देखॊ ओर सुनो यह एक कहानी, बताना ना भुलना, केसी लगी यह कहानी..

आरती संतोषी माता की

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

आरती संतोषी माता की
जय सन्तोषी माता, जय सन्तोषी माता।
अपने सेवक जन को, सुख सम्पति दाता॥ जय ..

सुन्दर चीर सुनहरी माँ धारण कीन्हों।
हीरा पन्ना दमके तन सिंगार लीन्हों॥ जय ..

गेरु लाल जटा छवि बदन कमल सोहे।
मन्द हसत करुणामयी त्रिभुवन मन मोहै॥ जय ..

स्वर्ण सिंहासन बैठी चँवर ढुरे प्यारे।
धूप दीप मधु मेवा, भोग धरे न्यारे॥ जय ..

गुड़ और चना परम प्रिय तामे संतोष कियो।
सन्तोषी कहलाई भक्तन विभव दियो॥ जय ..

शुक्रवार प्रिय मानत आज दिवस सोही।
भक्त मण्डली छाई कथा सुनत मोही॥ जय ..

मन्दिर जगमग ज्योति मंगल ध्वनि छाई।
विनय करे हम बालक चरनन सिर नाई॥ जय ..

भक्ति भाव मय पूजा अंगी कृत कीजै।
जो मन बनै हमारे इच्छा फल दीजै॥ जय ..

दु:खी दरिद्री रोगी संकट मुक्त किये।
बहु धन धान्य भरे घर, सुख सौभाग्य दिए॥ जय ..

ध्यान धरो जाने तेरौ मनवांछित फल पायौ।
पूजा कथा श्रवण कर उर आनन्द आयौ॥ जय ..

शरण गहे की लज्जा राख्यो जगदम्बे।
संकट तूही निवारे, दयामयी अम्बे॥ जय ..

संतोषी माँ की आरती जो कोई जन गावै।
ऋषि सिद्धि सुख संपत्ति जी भर के पावै॥ जय ..

मैं नहीं माखन खायो

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

मैं नहीं माखन खायो मैय्या मोरी, मैं नहीं माखन खायो ।
भोर भयो गऊवन के पीछे, मधुवन मोहि पठायोरी ।
चार पहर बंशीबन भट्क्यो, साँझ पडी घर आयोरी ॥

मैं माखन......................................
मै बालक बैयन को छोटो,छिको किस विध पायोरी ।
ग्वाल बाल सब गैला पडे हैं, बरबस मुख लिपटायोरी ॥

मैं माखन.............................................................
इतनी सुनके हंसी यशोदा, ले उर कंठ लगायोरी ।
सुर श्याम शरणागत तेरी, चरण कमल चित ल्यायोरी ॥

मैं माखन.............................................