बालगीत : डा, नागेश पांडेय ' संजय ' मैं क्या मेरे सारे साथी करते हैं इकरार, सभी दिनों में सबसे अच्छा दिन होता रविवार । चाहो तो घर पर खेलो या फिर पिकनिक पर जाओ, चाहो तो नजदीक गाँव की सैर करो, हरषाओ। कहने का मतलब, जो चाहो हँस कर कर लो यार! सभी दिनों में सबसे अच्छा दिन होता रविवार । पापा-मम्मी दोनों का ही प्यार मजे से पाओ, कुछ खाओ तो उनके हाथों बारी-बारी खाओ। सोना हो तो माँ से मांगो थपकी और दुलार, सभी दिनों में सबसे अच्छा दिन होता रविवार । काम क्लास का करना कितना देखो झट कर डालो, तुम अच्छे हो इसीलिए कुछ पढ़ा-लिखा दोहरा लो। हँसी, ज्ञान-विज्ञान के लिए पढ़ो खूब अखबार, सभी दिनों में सबसे अच्छा दिन होता रविवार । डा. नागेश पांडेय 'संजय' , सुभाष नगर , निकट रेलवे कालोनी , शाहजहांपुर - २४२००१ (उ.प्र., भारत ) ई -मेल - dr.nagesh.pandey.sanjay@gmail.com |
फरेब का तजुर्वा ...
2 hours ago






12 आप की राय:
बहुत बढ़िया बाल कविता ...
आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (16.04.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)
बहुत खुबसुरत वाल कविता जी, धन्यवाद
बहुत खुबसुरत वाल कविता| धन्यवाद|
रविवार का महत्त्व दर्शाती सुंदर पोस्ट | बधाई
आशा
सुंदर ....मजेदार कविता
बहुत खूब सुन्दर पोस्ट के लिए
बधाई ......
aadarniy raj ji bahut hi achhi v bachho ko manoranjan ke saath sixh deti pyaari si baal -kavita .
aapko v kavivar nagesh ji ko bahut bahut badhai
dhanyvaad
poonam
sunder kavita.
बहुत सुंदर चित्र, ओर सुंदर कविता धन्यवाद
बेहद सांगीतिक गे औ भाव पूर्ण रचना .आभार .
बहुत ही बढ़िया !
मेरी नयी पोस्ट पर भी आपका स्वागत है : Blind Devotion - अज्ञान
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नमस्कार,आप सब का स्वागत हे, एक सुचना आप सब के लिये जिस पोस्ट पर आप टिपण्णी दे रहे हे, अगर यह पोस्ट चार दिन से ज्यादा पुरानी हे तो माडरेशन चालू हे, ओर इसे जल्द ही प्रकाशित किया जायेगा,नयी पोस्ट पर कोई माडरेशन नही हे, आप का धन्यवाद टिपण्णी देने के लिये