प्रस्तुतकर्ता
डॉ. मोनिका शर्मा

गणपति बप्पा फिर से आये
मूषक पर होकर असवार
घर-घर में खुशियाँ ले आये
बह रही भक्ति रसधार
शिव के प्यारे गिरिजानंदन
बच्चों जैसे भोले- भाले
विघ्नविनाशन ज्ञान के दाता
भक्तों की बात कभी न टालें
प्रथम पूज्य गणेश जगवंदन
मोदक मिश्री इनको भायें
मन से ध्याओ दयावंत को
सब कारज सिद्ध हो जायें
आओ सब मिल शीश नवायें
मांगें मिलकर ये वरदान
मंगलमय हों कर्म हमारे
पायें सदगुण, निर्मल ज्ञान
गौरी नंदन गणपति बप्पा
करते हैं हम सब पर किरपा
आओ बच्चो मिलकर बोलो
हैप्पी बर्थ डे बप्पा........... हैप्पी बर्थ डे बप्पा
यह सुंदर कविता भी हमे डा० अनिल सवेरा जी ने भेजी है.....
मुन्ना मुन्नी पुछें नानी,
क्यो नही कहती कोई कहानी.
कहां गई परियो की बातें,
कहां गये वो राजा रानी.
नानी बोली.....
कया बतलाऊं तुमको बच्चो,
अब आ गया हे नया जमाना.
कम्पूटर ओर टी वी का अब,
हर बच्चा हो गया दिवाना.
टेंशन से मिले ना फ़ुरसत,
हम को वर्क भी मिलता ज्यादा.
बुलंदियो को बस छू ले हम,
हर बच्चे का यही इरादा.
यह सुंदर कविता हमे अनिल सवेरा जी ने इ मेल से भेजी है, उन की बहुत सी कविताये मै समय समय पर प्रकाशित करता हुं, आज की सुंदर कविता भी उन्होने भेजी है.....धन्यवाद
सॊगात
मन को टाटोलो जालिमो,
क्या चीख सुनती है.
नन्ही सी जान गर्भ मे,
कुछ सपने बुनती है.
रोशन करुंगी जग मे,
मै अपने कुल का नाम.
दोनो घरो को बनाऊ गी मै,
इस धरा पर धाम.
करुंगी ना कभी भी,
अधिकार की मै बात
जन्म मुझो को दो मां,
बस यही हे सॊगात
प्रस्तुतकर्ता
डॉ. मोनिका शर्मा

माँ की गोदी कितनी प्यारी
नरम मुलायम न्यारी- न्यारी
धीमी थपकी झीना आँचल
गोदी में माँ की खुशबू हर पल
इसमें सिमटकर मैं सो जाऊं
सुंदर सपनों में खो जाऊं
सपनों में भी माँ ही आए
मुझे हमेशा यह समझाए
अच्छा बनना सच्चा बनना
तू तो सबका बच्चा बनना
अपना पराया कभी करना
भेदभाव से दूर ही रहना
सबको होगा तुम पर नाज़
तुम करोगे दिलों पे राज़।
यह बाल कविता हमे अनिल सवेरा जी ने भेजी है, आप के पास भी कोई सुंदर सी बाल कविता तो तो हमे भेजे, कोई चित्र, या कुछ भी जो बच्चो से समबंधित हो हमे भेजे, हम उसे यहां प्रकाशित करेगे.
मम्मी जी ने थी खीर बनाई,
मुन्ना ने जी भर कर खाई.
मुन्नी को दी बिलकुल थोडी,
निकली है उस मै भी रोडी.
मुन्नी लगी जोर से रोने,
मां को दिये ना कपडे धोने.
दी मां ने फ़िर भर कटोरी,
लगी मटकने पोरी पोरी
यह बाल कविता भी हमे अनिल सवेरा जी ने भेजी है
बंदर बाबु पेंट पहन कर
पहुंच गये ससुराल.
खा के मीठा पान उन्होने
होंठ कर लिये लाल
बंदरिया भी सम्रार्ट बन गई
पहन के लंहगा चोली
खाऊंगी मै रस मलाई
बंदर से वह बोली
रस मलाई खाते कैसे?
पास नही था पैसा
लोट के घर को आये ऎसे
बंधु गये थे जेसे
बच्चो आओ आज आप को हम एक विज्ञानिक जी से मिलवाते है, यह है हमारे दर्शन लाल बवेजा जी,विज्ञान अध्यापक (शिक्षा विभाग, हरियाणा) से
तो चले इन के अविषकार देखे......
आवश्यक सामग्री ---- दो इंजक्शन की सिरिंज ,तीन इंच पाइप का टुकड़ा
सिद्धांत ---- वायु दबाव, निर्वात (Vaccum)
बनाने की विधि---- कार्य विधि----दो इंजक्शन की सिरिंज ले कर उन्हें एक तीन इंच के पाइप के टुकड़े से जोड़ देते है | पाइप और इंजक्शन की सिरिंज के जोड़ एयर टाइट होने चाहिए इस के लिए हम किसी भी अच्छे चिपकने वाले पदार्थ जैसे फैवी क्विक का प्रयोग कर सकते है | जोड़ते वक्त एक सिरिंज का पिस्टन 1\2 की अन्दर और दूसरी सिरिंज का पिस्टन पूरा बहार की और होना चाहिए |
पुरा पढने के लिये यहां किल्क करे
यह प्यारी सी कविता हमे भेजी है, कवि राज डां अनिल सवेरा जी ने, अगर आप भी कोई बाल कविता भेजना चाहे या आप इस ब्लांग से जुडना चाहे तो हमे मेल करे, आप सब का स्वागत है.
उपहार
पापा ले आये एक माला,
मुन्नी ने था भगंडा डाला.
माला लगी उसे बडी प्यारी,
खुश थी उस की सखियां सारी.
पहन उसे वह गई स्कूल,
लिया वहां से गुलाब का फ़ुल.
पापा को दिया उपहार,
पापा ने किया बहुत प्यार