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मेरे नाम अनेक -डा. नागेश पांडेय 'संजय'

प्रस्तुतकर्ता डॉ. नागेश पांडेय संजय

शिशुगीत : डा. नागेश पांडेय 'संजय'

मेरे नाम अनेक , दोस्तों , 
मैं छोटा सा भोलू . 
कोई मुझसे सोनू कहता ,
 कोई  कहता गोलू .
दादा जी कहते हैं टिंकू , 
दादी कहती कालू . 
मम्मी मुझसे लल्ला कहतीं,
 पापा कहते लालू . 
मेरे घर जब आता कोई,
कहता -नाम बताओ ?
चुप रह जाता , सर चकराता
क्या बोलूँ ? बतलाओ ?

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घुमक्कड़ पुल्लू

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

केसे हो बच्चो तुम सब, अरे अरे अब तो छुट्टियां चल रही होगी ना; तो खुब मजा ले रहे होंगे ना, दादा दादी तो बहुत खुश होंगे, लेकिन ममा ओर पापा की नाक मे दम कर रखा होगा, सची न..... चलो आज हम तुम्हे नये साल पर एक बहुत सुंदर कविता उपहार मे पढा रहे हे..... अरे सुनो सुनो... पहले पढो तो सही फ़िर देखना कितना मजा आयेगा, लेकिन यह कविता मैने थोडे लिखी हे, अब जिन अंकल ने लिखी हे पहले उन से मिल लो ना,.....

यह प्यारी सी कविता हमे  डॉ. नागेश पांडेय "संजय" अकंल( आप सब के अंकल) ने इ मेल से स्पेशल आप सब के लिये भेजी हे, अरे अब इन का चित्र भी साथ मे लगा रहा हुं खुद ही मिल से, जेसे इन की प्यारी प्यारी कविता हे ना वेसे ही यह भी प्यारे प्यारे लगते हे, तो यह रहा इन का चित्र, ओर उस के नीचे इन का सुंदर शिशु गीत.

घुमक्कड़ पुल्लू

एक बार की बात
 घुमक्कड़ पुल्लू , 
घुम्मी करते- करते
 पहुंचे कुल्लू . 
पर कुल्लू  की
 ठण्ड देख घबडाए , 
छींक  मारते 
घर को वापस आए . 

डा. नागेश पांडेय ' संजय ' 
बच्चो बताना केसा लगा यह शिशु गीत, ओर अंकल को धन्यवाद देना