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माँ जगदम्बे दो वरदान

प्रस्तुतकर्ता डॉ. मोनिका शर्मा













हे माँ अम्बे जय जगदम्बे
हमको दीजे ये वरदान

कभी ना खंडित होने दें
हम मातृभूमि का मान

वरद हस्त सिर पर रख माता
दिव्य चेतना भर दो मन में
समरसता की शुभ ज्योति को
फैलायेंगें हम कण -कण में

भारत माँ के सारे बच्चे
सिंह रूप हम धर लेंगें
दिव्य धरा का मान बचाने
हर बाधा से लड़ लेंगें

विंध्य, हिमाचल, अरावली का
ना झुकने दें माथा
देव भूमि है धरा हमारी
गायें सब मिल गाथा

पौरुषता का तेज भरो माँ
हम भगत, सुभाष बनें
जग-सिरमौर बने फिर भारत
माँ भारती का विश्वास बनें




चैतन्य का कोना ब्लॉग पर विजय माथुर जी टिप्पणी के शब्द इस रचना के लिए प्रेरणा बने..... उनकी ह्रदय से आभारी हूँ....