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प्रस्तुतकर्ता निर्मला कपिला

इच्छा

अम्मा नित्य रात को नभ मे
चँदा मामा क्यों आते हैं
सुबह देख कर सूरज दादा
दूर पहाडी क्यों छुप जाते हैं

सोच रहा हूँचँदा मामा
के संग मे जी भर कर खेलूँ
चन्द्र लोक सीढी से जाऊँ
हँस कर सारे संकट झेलूँ

चन्द्र लोक से रोज बृहपति
ग्रह की यात्रा पर मै जाऊँ
मंगल ग्रह ध्रुव लोक निहारूँ
अमृत कलश वहाँ से लाऊँ

धरती पर मुस्काने बाँटूँ
सब को अमृत बूँद पिलाऊँ
नहीं किसी का करूँ निरादर
सब को अपने गले लगाऊँ

लेखक---- डा. चक्रधर नलिन