नमस्कार, आईये जुडे मेरे इस ब्लांग से, आप अपनी बाल कहानियां, कविताय़ॆ,ओर अन्य समाग्री जो बच्चो से के लायक हो इस ब्लांग मे जोडॆ,आप अगर चाहे तो आप भी इस ब्लांग के मेम्बर बने ओर सीधे अपने विचार यहां रखे, मेम्बर बनने के लिये मुझे इस e mail पर मेल करे, ... rajbhatia007@gmail.com आप का सहयोग हमारे लिये बहुमुल्य है,आईये ओर मेरा हाथ बटाये.सभी इस ब्लांग से जुड सकते है, लेकिन आप की रचनाये सिर्फ़ सिर्फ़ हिन्दी मे हो, आप सब का धन्यवाद

मैं नहीं माखन खायो

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

मैं नहीं माखन खायो मैय्या मोरी, मैं नहीं माखन खायो ।
भोर भयो गऊवन के पीछे, मधुवन मोहि पठायोरी ।
चार पहर बंशीबन भट्क्यो, साँझ पडी घर आयोरी ॥

मैं माखन......................................
मै बालक बैयन को छोटो,छिको किस विध पायोरी ।
ग्वाल बाल सब गैला पडे हैं, बरबस मुख लिपटायोरी ॥

मैं माखन.............................................................
इतनी सुनके हंसी यशोदा, ले उर कंठ लगायोरी ।
सुर श्याम शरणागत तेरी, चरण कमल चित ल्यायोरी ॥

मैं माखन.............................................

भजन ओर भजन

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

प्रेम मुदित मन से कहो राम राम राम

प्रेम मुदित मन से कहो, राम, राम, राम .
राम, राम, राम, श्री राम, राम, राम ..

पाप कटें, दुःख मिटें, लेत राम नाम .
भव समुद्र, सुखद नाव, एक राम नाम ..

प्रेम मुदित मन से कहो, राम, राम, राम .
राम, राम, राम, श्री राम, राम, राम ..


परम शांति, सुख निधान, नित्य राम नाम .
निराधार को आधार, एक राम नाम ..

प्रेम मुदित मन से कहो, राम, राम, राम .
राम, राम, राम, श्री राम, राम, राम ..

संत हृदय सदा बसत, एक राम नाम .
परम गोप्य, परम इष्ट, मंत्र राम नाम ..

प्रेम मुदित मन से कहो, राम, राम, राम .
राम, राम, राम, श्री राम, राम, राम ..

महादेव सतत जपत, दिव्य राम नाम .
राम, राम, राम, श्री राम, राम, राम ..

प्रेम मुदित मन से कहो, राम, राम, राम .
राम, राम, राम, श्री राम, राम, राम ..

मात पिता, बंधु सखा, सब ही राम नाम .
भक्त जनन, जीवन धन, एक राम नाम ..

प्रेम मुदित मन से कहो, राम, राम, राम .
राम, राम, राम, श्री राम, राम, राम ..

***************************************************************
हारिये न हिम्मत, बिसारिये न राम

हारिये न हिम्मत, बिसारिये न राम .
तू क्यों सोचे बंदे, सब की सोचे राम ..

दीपक ले के हाथ में, सतगुरु राह दिखाये .
पर मन मूरख बावरा, आप अँधेरे जाए ..

हारिये न हिम्मत, बिसारिये न राम .
तू क्यों सोचे बंदे, सब की सोचे राम ..


पाप पुण्य और भले बुरे की, वो ही करता तोल .
ये सौदे नहीं जगत हाट के, तू क्या जाने मोल ..

हारिये न हिम्मत, बिसारिये न राम .
तू क्यों सोचे बंदे, सब की सोचे राम ..


जैसा जिस का काम, पाता वैसे दाम .
हारिये न हिम्मत, बिसारिये न राम .
तू क्यों सोचे बंदे, सब की सोचे राम ..
**********************************************************
श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण


श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम् ,
नवकञ्ज लोचन कञ्ज मुखकर कञ्जपद कञ्जारुणम् ........1


कंदर्प अगणित अमित छबि नव नील नीरज सुन्दरम् ,
पटपीत मानहुं तड़ित रुचि सुचि नौमि जनक सुतावरम् ........2

भजु दीन बन्धु दिनेश दानव दैत्यवंशनिकन्दनम् ,
रघुनन्द आनंदकंद कोशल चन्द दशरथ नन्दनम् .............3

सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदार अङ्ग विभूषणम् ,
आजानुभुज सर चापधर सङ्ग्राम जित खरदूषणम् .............4


इति वदति तुलसीदास शङ्कर शेष मुनि मनरञ्जनम् ,
मम हृदयकञ्ज निवास कुरु कामादिखलदलमञ्जनम् .............5

******************************************************
भज मन राम


भज मन राम चरण सुखदाई .....1
जिन चरनन से निकलीं सुर सरि, शंकर जटा समायी .
जटा शन्करी नाम पड़्यो है, त्रिभुवन तारन आयी ..

भज मन राम चरण सुखदाई ..2

शिव सनकादिक अरु ब्रह्मादिक, शेष सहस मुख गायी .
तुलसीदास मारुतसुत की प्रभु, निज मुख करत बड़ाई ..

भज मन राम चरण सुखदाई ..

**********************************************************
ठुमक चलत रामचंद्र


ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां ..
किलकि किलकि उठत धाय,
गिरत भूमि लटपटाय .
धाय मात गोद लेत,
दशरथ की रनियां .




ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां ..
अंचल रज अंग झारि,
विविध भांति सो दुलारि .
तन मन धन वारि वारि,
कहत मृदु बचनियां .




ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां ..
विद्रुम से अरुण अधर,
बोलत मुख मधुर मधुर .
सुभग नासिका में चारु,
लटकत लटकनियां .




ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां ..
तुलसीदास अति आनंद,
देख के मुखारविंद .
रघुवर छबि के समान
रघुवर छबि बनियां ..


ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां ..

राम के भजन

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

जानकी नाथ सहाय करें


जानकी नाथ सहाय करें जब कौन बिगाड़ करे नर तेरो ..

सुरज मंगल सोम भृगु सुत बुध और गुरु वरदायक तेरो .
राहु केतु की नाहिं गम्यता संग शनीचर होत हुचेरो .

जानकी नाथ सहाय करें जब कौन बिगाड़ करे नर तेरो ..

दुष्ट दु:शासन विमल द्रौपदी चीर उतार कुमंतर प्रेरो .
ताकी सहाय करी करुणानिधि बढ़ गये चीर के भार घनेरो .

जानकी नाथ सहाय करें जब कौन बिगाड़ करे नर तेरो ..

जाकी सहाय करी करुणानिधि ताके जगत में भाग बढ़े रो .
रघुवंशी संतन सुखदायी तुलसीदास चरनन को चेरो .

जानकी नाथ सहाय करें जब कौन बिगाड़ करे नर तेरो ..

******************************************************

राम से बड़ा राम.......


राम से बड़ा राम का नाम .
अंत में निकला ये परिणाम, ये परिणाम,
राम से बड़ा राम का नाम ........

सिमरिये नाम रूप बिनु देखे,
कौड़ी लगे ना दाम .
नाम के बांधे खिंचे आयेंगे,
आखिर एक दिन राम .
राम से बड़ा राम का नाम ........

जिस सागर को बिना सेतु के ,
लांघ सके ना राम .
कूद गये हनुमान उसी को,
लेकर राम का नाम .
राम से बड़ा राम का नाम .........

वो दिलवाले डूब जायेंगे ओर वो दिलवाले क्या पायेंगे ,
जिनमें नहीं है नाम ..
वो पत्थर भी तैरेंगे जिन पर
लिखा हुआ श्री राम.
राम से बड़ा राम का नाम ..................
******************************************************
सीताराम, सीताराम, सीताराम कहिये



सीताराम, सीताराम, सीताराम कहिये .
जाहि विधि राखे, राम ताहि विधि रहिये ..

मुख में हो राम नाम, राम सेवा हाथ में .
तू अकेला नाहिं प्यारे, राम तेरे साथ में .
विधि का विधान, जान हानि लाभ सहिये .

सीताराम, सीताराम, सीताराम कहिये .
जाहि विधि राखे, राम ताहि विधि रहिये ....


किया अभिमान, तो फिर मान नहीं पायेगा .
होगा प्यारे वही, जो श्री रामजी को भायेगा .
फल आशा त्याग, शुभ कर्म करते रहिये .

सीताराम, सीताराम, सीताराम कहिये .
जाहि विधि राखे, राम ताहि विधि रहिये ..

ज़िन्दगी की डोर सौंप, हाथ दीनानाथ के .
महलों मे राखे, चाहे झोंपड़ी मे वास दे .
धन्यवाद, निर्विवाद, राम राम कहिये .

सीताराम, सीताराम, सीताराम कहिये .
जाहि विधि राखे, राम ताहि विधि रहिये ..

आशा एक रामजी से, दूजी आशा छोड़ दे .
नाता एक रामजी से, दूजे नाते तोड़ दे .
साधु संग, राम रंग, अंग अंग रंगिये .
काम रस त्याग, प्यारे राम रस पगिये .

सीता राम सीता राम सीताराम कहिये .
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये ..

**************************************************************

मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में


मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में ..

जो सुख पाऊँ राम भजन में
सो सुख नाहिं अमीरी में
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में ......

भला बुरा सब का सुन लीजै
कर गुजरान गरीबी में
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में ......

आखिर यह तन छार मिलेगा
कहाँ फिरत मग़रूरी में
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में .......

प्रेम नगर में रहनी हमारी
साहिब मिले सबूरी में
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में ........

कहत कबीर सुनो भयी साधो
साहिब मिले सबूरी में
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में .. .......

************************************************************
पायो जी मैंने, राम रतन धन पायो

पायो जी मैंने....
राम रतन धन पायो ..

वस्तु अमोलिक,
दी मेरे सतगुरु,
किरपा करि अपनायो .
पायो जी मैंने,
राम रतन धन पायो .......


जनम जनम की पूंजी पाई,
जग में सभी खोवायो .
पायो जी मैंने,
राम रतन धन पायो ........

खरचै न खूटै,
जाको चोर न लूटै,
दिन दिन बढ़त सवायो .
पायो जी मैंने,
राम रतन धन पायो ......

सत की नाव,
खेवटिया सतगुरु,
भवसागर तर आयो .
पायो जी मैंने,
राम रतन धन पायो ......

मीरा के प्रभु गिरिधर नागर,
हरष हरष जस गायो .
पायो जी मैंने,
राम रतन धन पायो .....
**************************************************

मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई
जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति
तात मात भ्रात बंधु आपनो न कोई
छांड़ी दई कुलकी कानि कहा करिहै कोई
संतन ढिग बैठि बैठि लोक लाज खोई
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई...
चुनरी के किये टूक ओढ़ लीन्ही लोई
मोती मूंगे उतार बनमाला पोई
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई...
अंसुवन जल सीचि सीचि प्रेम बेलि बोई
अब तो बेल फैल गई आंनद फल होई
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई....
दूध की मथनियां बड़े प्रेम से बिलोई

माखन जब काढ़ि लियो छाछ पिये कोई
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई...
भगति देखि राजी हुई जगत देखि रोई
दासी मीरा लाल गिरधर तारो अब मोही
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई....

राम रतन धन पायो

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

यह भजन हम सब के लिए हे

पायो जी मैने राम रतन धन पायो
पायो जी मैने राम रतन धन पायो
वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु,
किरपा कर अपनायो
पायो जी मैने राम रतन धन पायो
जनम जनम की पूंजी पाई,
जग में सभी खोवायो
पायो जी मैने राम रतन धन पायो
खरचे ना खूटे, चोर न लूटे,
दिन-दिन बढ़त सवायो
पायो जी मैने राम रतन धन पायो
सत की नाव खेवटिया सतगुरु,
भवसागर तर आयो
पायो जी मैने राम रतन धन पायो
मीरा के प्रभु गिरधर नागर,
हरष हरष जस गायो
पायो जी मैने राम रतन धन पायो......