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chchanda mama

प्रस्तुतकर्ता निर्मला कपिला

चन्दा मामा
चन्दा मामा हाथ उठा कर,
भईया जी हैं नित्य बुलाते।
सोते नहीं देखते एक टक ,
कब से इन को खडे सुलाते

आसमान से नाता तोडो,
अपने को धरती से जोडो।
मुस्काते हैं गोद उठाओ,
इन से कभी नहीं मुख मोडो।

इन के संग घोड्र पर बैठो,
इन के संग हाथी पर बैठो।
दूध मलाई जी भर खाऔ,
भईया के घर चन्दा आओ।
लेखक --डा. चक्रधर नलिन जी

chiychidiya ban jaoon--baal kavita

प्रस्तुतकर्ता निर्मला कपिला

चिडिया बाल कविता
चिडिया बन जाऊँ

चाह रहा चिडिया बन जाऊँ।
पँख लगा कर नभ छू जाऊँ।

मुझ को अच्छा लगता ऊडना,
डाल डाल मीठे फल चखना।
देश भविश्य नया सुख पाऊँ.
चाह रहा चिडिया बन जाऊँ।

पर्वत सागर घूमूँ जी भर,
रहूँ किसी पर कभी न निर्भर।
तारों के संग नाचूँ गाऊँ.
चाह रहा चिडिया बन जाऊँ।

सरल मधुर हो खग सा जीवन ,
हो सुख दुख से उपर तन मन ।
जो भी मिले खुशी से खाऊँ,
चाह रहा चिडिया बन जाऊँ।
लेखक डा. चक्रधर नलिन

loosi raani--kavita

प्रस्तुतकर्ता निर्मला कपिला

लूसी रानी
लूसी रानी सूट पहन कर
बाँध गले मे टाई
भों भों कर अँग्रेजी बोले
हेलो बाई बाई
भागी देख बंदर भईया
जब पड गये दिखाई
विभु दादा डंडा ले कर दौडे
इनकी जान बचाई
खों खों कर बन्दर जी लौटे
रुकी साँस फिर आयी
जान बची लूसी रानी की
देती थैन्क्स बधाई
लेखक डा. चक्रधर नलिन जी

कॊवा ओर सयानी चिडिया

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

आओ बच्चो तुम्हे एक फ़िल्म दिखाते है, बहुत सुंदर , एक शिक्षा से भरी, यह फ़िल्म देख कर बताना कि तुम ने क्या शिक्षा ली इस फ़िल्म से, बहुत सुंदर कहानी है, तो बच्चो देखो...

अक्षत की चाल्

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

मम्मी पापा का हो गया झगडा
सोचा मैं जाऊँगा रगडा
खेल कूद नहीं पाऊँगा
साथ मे डाँट भी खाऊँगा
अब कोई जुगत लगानी होगी
दोनो की सुलह करानी होगी
नहीं तो सच ही जाऊँगा मारा
मैं छोटा सा अक्षत बेचारा
बस फिर ज़ोर से वो चिल्लाया
पेट दर्द का ढोंग रचाया
मम्मी ने पापा को आवाज़ लगाई
दोनो की तो जान पे बन आयी
दोनो ने मिल कर दवा पिलायी
अक्षत ने भी झ्ट शर्त लगायी
तभी पीऊँगा मै दवा
ागर करोगे मुझे से वादा
मुझे बाज़ार ले जाओगे
आईस्क्रीम खिलाओ गे
पीनी पडी कडवी दवाई
पर दोनो की सुलह कराई
कविता निर्मला कपिला दुवारा

बंदर की दुकान पर चले...

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

बच्चो तुम्हे पता है एक बार जंगल मै एक सयाने बंदर ने एक दुकान खोली.... अरे हां यार तुम मानो या ना मानो, सची मुची, ओर हां बंदर था भी बहुत सयाना, अरे तुम तो हंस रहे हो ... यार मान भी जाओ.... अरे तो खुद ही देख लो... इस बंदर की दुकान...

एक सीख

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

बच्चो आओ आज तुम्हे निर्मला आंटी जी की भेजी एक कविता सुनाते है, पढ कर बताना ओर निर्मला आंटी को धन्यवाद भी बोलना..... बहुत अच्छी कविता है, तो यह लो ...

एक सीख
आओ बच्चो तुम्हें दिखाऊँ
इक मँदिर इक गुर्दुवारा
देखो दोनो मे भगवान है
क्या मेरा क्या तुम्हारा
मस्जिद देखो या देखो चर्च
शीश झुकाना सब का फर्ज़
बच्चो तेरे मेरे की
कभी ना डालो रीत
मिलजुल कर रहोगे जितना
बढेगी उतनी प्रीत
सब धर्मों का एक ही सार
दया करुणा प्रेम पियार
गर तुम इसको मानोगे
तभी प्रभू को जानोगे
निर्मला कपिला जी की कलम से

बच्चे मन के सच्चे...

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

अरे बच्चो ! कहां हो भाई, सुना है बहुत गर्मी पड रही है , बाप रे, बच के रहना, बच्चो खुब पानी पीना, शिकंजवी,लस्सी ओर ऎसी बहुत सी चीजे जो आप सब के मम्मी पापा कहे, ओर हां ज्यादा चीनी नही बेटे, ओर पानी ऊबाल कर पीना तो ज्यादा अच्छा होगा.
चलो आज तुम्हे एक बहुत सुंदर गीत सुनाते है !! अरे मुझे कहां आता है गाना, अरे मुझे तो गीत लिखना भी नही आता, बस तुम सब के लिये मै सुंदर सुंदर गीत ढुंढु ढुंढ कर लाता हुं, तो बच्चो सुनो यह गीत..