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मेला (एक पंजाबी बाल कविता)

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

यह कविता भी मुझे डां अनिल सवेरा जी ने भेजी है , ओर मै यहां सब बच्चो के नाम इसे प्रकाशित कर रहा हुं.

साढे पिंड बिच लग्या मेला
 मै बापू नाल ग्या अकेला


बज रिया सी पॊ पॊ वाजा
झुले वाला केन्दा आजा

खिडोने बिकदे प्यारे प्यारे
बिकदे सी रंग बिरंगे गुब्बारे


मिठ्ठाई वेखी ते टपकी लार
जादुगर दा शो तेयार

घुमे अस्सी मज्जे नाल मेला
रेह्या जेब चा ना ईक भी धेला

   Dr. Anil savera

टक्कर, एक बाल कविता

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

प्यारे बच्चो यह कविता भी हमे अकल डां अनिल सवेरा जी ने आप सब के लिये भेजी है, आशा करता हू आप सब को पसंद आये, अगर पसंद आये तो अकल अनिल सवेरा जी को धन्यवाद जरुर कहे

हाथी जी को, आया चक्कर,
मच्छर ने जब मारी टक्कर,
टक्कर मार, खुशी से नाचा,
खाने लगा, मजे से शक्कर!!

बोला हाथी, नही छोडुंगा,
हाथ -पांव तेरे तोडूंगा,
क्रोध दिला मत मुझको ज्यादा,
नही तो तेरा सर फ़ोडूंगा.

मुस्कुरा कर मच्छर बोला,
करो तो कुछ,तुम अपना ध्यान,
फ़ूक मजाक मै ही मारू तो,
पहुच जाओगे, तुम शमशान.

लेखक डां अनिल सवेरा

होली का त्योहार

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

यह चित्र मेने josh18.in.com से लिया है, उन का आभार,एतराज होने पर हटा दिया जायेगा
यह रचना मुझे इ मेल से आज डां अनिल सवेरा जी ने भेजी है हरियाणा से, ओर मुझे बहुत अच्छी लगी तो मेने इसे यहां प्रकाशित कर दिया, तो बच्चो आओ ओर सब से पहले डां अनिल जी का धन्यवाद करे... ओर फ़िर देखे यह सुंदर सी बाल कविता जो होली के रंग मै पुरी तरह से रंगी है.

होली का त्योहार अनोखा,
जिस मे है उत्साह.
बिल्ली मोसी को रंग कर
चुहा भी बोला वाह!!


हिरण आज कुचांले भरता
बना हुआ है शेर.
रंगा शेर को प्यार के रंग मे,
शेर रहा ना शेर.

एक अचंभा ऎसा देखा
उल्लू खेले दिन मे होली,
लोमडी काकी सजा रही है
रंगो से सुंदर होली.

होली का त्योहार अनोखा,
जिस मे है उत्साह.
बिल्ली मोसी को रंग कर
चुहा भी बोला वाह!!

एक अनूठी बात बताऊं

प्रस्तुतकर्ता gazalkbahane




आओ बच्चो,पाठ पढ़ाऊं
एक अनूठी बात बताऊं
काले अक्षर हीरा मोती
फ़ैलाते ये ज्ञान की ज्योति
अक्षर जुड़कर शब्द बनायें
शब्द मिलें बोली बन जायें
बोली संवरे भाषा कहलाये
भाषा से पुस्तक छप जाये
बात पुस्तकों की है न्यारी
पुस्तक होती ज्ञान पिटारी
पुस्तक पुस्तकालय में आकर
गागर में भर जाये सागर
पढने लिखने से फ़ैले ज्ञान
भाषा है मानव की पहचान

श्याम सखा श्याम

पोपाईय ओर आजादी

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

अरे बच्चो देखॊ तो सही यह पोपई केसे कैसे काम कर रहा है...

ब्रह्म कमल -बाल कविता

प्रस्तुतकर्ता निर्मला कपिला

ब्रह्म कमल
गिरी शिखरों मे सुन्दर खिलता
हँसता रहता ब्रह्म कमल
महकाता फूलों की घाटी
मखमल सा लगता कोमल

निचला भाग बैंगनी हल्का
ऊपर भाग गुलाबी सा
मनह इसका रंग बना है
पुष्प न और जवाबी सा

नित देवों के सिर पर चढ कर
यह धरती निधि बन जाता
बिना स्नान जो तोडता
वो  अधर्म कमाता है

ये अगस्त से अक्तूबर तक
बिखराता सौन्दर्य अपार
दर्शक मन्त्रमुग्ध रह जाते
सुषमा इसकी सुबह निहार

शिव प्रतिमा पर शोभा पाता
चढता है केदार के मंदिर
ये सहस्त्रदल कमल अनूठा
पाता मन श्रद्धा और आदर
    डा़ चक्रधर नलिन

दीपावली के शुभ अवसर पर आपको और आपके परिवार को शुभकामनाएं

प्रस्तुतकर्ता राज भाटिय़ा

diwali lamps




दीपावली के शुभ अवसर पर आपको और आपके परिवार को शुभकामनाएं

बापू --बाल कविता

प्रस्तुतकर्ता निर्मला कपिला

बापू
भारत की पुकार थे बापू
धरती की बहार थे बापू

जो सोचा वो करने वाले
नहीं किसी से डरने वाले
कंटक पथ पर चलने वाले
दीप शिखा से जलने वाले
कभी न राह बदलने वाले
शासक क्रूर मसलने वाले

सत्य अहिंसा हार थे बापू
पावन हृदय विचार थे बापू

भारत को चमकाने वाले
हिन्दी को अपनाने वाले
देश महान बनाने वाले
जग मे प्रेम बढाने वाले
सेवाधर्म  सिखलाने वाले
राष्ट्रपिता कहलाने वाले

सच्चे  नेक उदार थे बापू
जनता का आधार थे बापू

लेखक डा.चक्रधर नलिन